Copyright :-

© Renu Mishra, All Rights Reserved

गुरुवार, 22 अगस्त 2013

इक अर्ज़ी है तुमसे …

 
 मेरा दिल काँच सा टूट गया है
एक टुकड़ा आके चुभ-सा गया है
जो खुद को खोया, उसको पाया
अब वो ही मुझसे गुम सा गया है.

काश वो समझे, काश वो जाने
दिल का टूटना होता क्या है
सौ टुकड़े हो के भी, उसको पुकारे
वो कौन सा मंतर फूँक गया है .

इश्क़-समंदर बाद की बातें
चाहत की दरिया में उतरो तो जाने
वो कश्ती अब क्या दरिया में उतरे
जिसका माझी ही रूठ गया है.

जो तुम रूठे हो तो मना भी लें
ना मानो तो तुम्हें सता भी लें
पर कैसे समझाएं तुमको,
तुम्हारे दिल का इक टुकड़ा …
हमारे अनकहे जज्बातों का ,
मिलते जुलते खयालातों का ,
तुम्हारे उन रौशन सवालातों का ,
मेरी दिल्लगी भरी जवाबी रातों का…
मुझमें ही कहीं छूट गया है .

हो सके तो आके ले जाना…
तुम्हारा जो मुझमे छूट गया है
और कर जाना मुझे बिलकुल खाली, 
छोड़ जाना मुझे बिलकुल तन्हा ….
सोच लूंगी…कोई अपना ही, मुझे लूट गया है :(


by :-
रेनू मिश्रा




2 टिप्‍पणियां: