अपनी राह खुद बना रही हूँ,
मंज़िल पा लूं... तो चलूँ
ज़िंदगी के अन कहे नगमे,
होठों पे सजा लूं... तो चलूँ
मन का गीत गा लूं... तो चलूँ |
तिनका, दाना, शाख- पत्ते ,
मिल गए कुछ लुगदी- लत्ते |
सहेज रही हूँ उन्हें प्यार से,
एक नीड़ बना लूं... तो चलूँ
मन का गीत गा लूं...तो चलूँ |
कैसे हैं अपने -बेगाने से रिश्ते,
कुछ अधूरी सी बातें, अधूरे से किस्से |
जज्बातों की गुत्थी सुलझा रही हूँ,
अपना- पराया जान लूं...तो चलूँ
मन का गीत गा लूं... तो चलूँ |
देखा कई लोगों को रूप बदले,
जाना है कितनी इंसानी फितरतें |
ज़िन्दगी बहुत कुछ सिखा रही है,
शुक्रिया मना लूं ...तो चलूँ
मन का गीत गा लूं... तो चलूँ ......